निफ्टी के Hero जो आज हो गए Zero! Wealth Creater से Wealth Destroyer बनने की कहानी

निफ्टी के Hero जो अब हो गए Zero! Wealth Creater से Wealth Destroyer बनने की कहानी

रिलायंस कम्यूनिकेशंस, जेट एयरवेज, यूनिटेक ये कुछ ऐसे नाम हैं जो कभी निफ्टी के चमकते सितारे रहे, लेकिन आज गुमनामी के अंधेरे चले गए हैं. ये कंपनियों जो एक समय में निफ्टी का हिस्सा थीं, लोग इन्हें वेल्थ क्रिएटर मानते थे, लेकिन ये सबसे बड़े वेल्थ डिस्ट्रॉयर बन गए. इन स्टॉक्स ने निवेशकों की बड़ी पूंजी को खत्म कर दिया है. ऐसे ही 8 शेयरों के Hype से बर्बादी की कहानी बताने जा रहा हूं. 


Biggest Wealth Destroyers Anil Ambani to Jet Airways Nifty Stars That Crashed and Burned Investors

RELIANCE POWER 

ALL TIME HIGH: ₹500 

FALL FROM ATH: 95%

एक ज़माने में ADA ग्रुप का हिस्सा रही अनिल अंबानी की रिलायंस पावर निफ्टी का हिस्सा हुआ करती थी. जब ये बाजार में एंट्री ले रही थी, उस वक्त देश का सबसे बड़ा IPO लेकर आई थी, लेकिन समय के साथ इसने निवेशकों को बर्बाद कर दिया और देश के सबसे बड़े wealth destroyers में से एक बन गई. जनवरी 2008 में जब इसका मेगा IPO आया था, तो कुछ ही मिनटों में ये 70-75 गुना तक सब्सक्राइब हो गया था. तब इसने 450 रुपये प्रति शेयर के भाव पर 11,653 करोड़ रुपये जुटाए थे. 

11 फरवरी, 2008 को इसकी लिस्टिंग हुई, NSE पर करीब 18% प्रीमियम के साथ 530 रुपये पर इसकी लिस्टिंग हुई थी. रिलायंस पावर को लेकर उस वक्त ऐसा माहौल था कि हर कोई इस पर दांव खेल रहा था, क्योंकि कंपनी की 30,000+ MW क्षमता की योजनाएं थी, इसको ब्लू-चिप पावर दिग्गज के रूप में देखा जा रहा था. सितंबर 2008 में ये डॉ.रेड्डीज की जगह पर निफ्टी50 में शामिल हुई.  

मगर, आगे जो हुई उसका किसी को अंदाजा नहीं था. ADA ग्रुप भारी कर्ज में डूब गया. कोल ब्लॉक कैंसिल होने, प्रोजेक्ट्स में देरी, भारी कर्ज और पावर सेक्टर में गलाकाट कंपटीशन ने कंपनी को तबाह कर दिया. 2018-19 तक रिस्ट्रक्चरिंग होती रही, लेकिन 2020 आते-आते ये hyped स्टॉक पेनी स्टॉक बन चुका था. 

अब अपने ऑल टाइम हाई से 95% तक अपनी वैल्यू खो चुका है. लिस्टिंग के वक्त इसकी मार्केट कैप करीब 1-1.2 लाख करोड़ रुपये हुआ करती थी, आज की तारीख में शेयर 25 रुपये का है और मार्केट कैप महज 10,400 करोड़ रुपये के आस-पास है.  

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RELIANCE COMMUNICATION

ALL TIME HIGH: 850 

FALL FROM ATH: 99%

एक ज़माने में अनिल अंबानी (ADA ग्रुप) की Reliance Communications (RCOM) भी भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में से एक थी. 2006 में रिलायंस इंडस्ट्रीज से अलग होने के बाद ये अनिल अंबानी फ्लैगशिप टेलीकॉम कंपनी थी. इसने 3G स्पेक्ट्रम ऑक्शन में भारी निवेश किया, विदेशों में भी विस्तार किया. इंफ्रास्ट्रक्चर में Reliance Infratel जैसी सब्सिडियरीज भी बनाईं. 

जल्द ही ये कंपनी निफ्टी का हिस्सा बन गई, जनवरी 2008 में इसने 850 रुपये का ऑल टाइम हाई बनाया. CDMA और GSM दोनों में मजबूत पकड़ रखने वाली रिलायंस कम्यूनिकेशंस उस वक्त टेलीकॉम बूम की लहर पर सवार थी. ये वो दौर था, जब चारों तरफ सिर्फ अनिल अंबानी की चर्चा थी. मगर, स्थितियां बदलते देर नहीं लगी. कंपनी टेलीकॉम में बढ़ते कंपटीशन को झेल नहीं सकी. 

कंपनी ने 2G-3G विस्तार के लिए हजारों करोड़ रुपये का कर्ज लिया, लेकिन उसे सही तरीके से भुना नहीं सकी. फिर रही सकी कसर 2016 में Reliance Jio के एंट्री ने पूरी कर दी. 2017 में कंपनी का कामकाज बंद करना पड़ा, 2019 में कंपनी पर दिवालिया की प्रक्रिया शुरू हुई. कंपनी कानूनी पचड़ों में फंस गई और ठप हो गई. 

रिलायंस कम्यूनिकेशंस अब अपने ऑल टाइम हाई से 99%+ वैल्यू खो चुका है, यानी जिन्होंने भी इसमें पैसा लगा रखा होगा, उनकी पूरी वैल्यू खत्म हो चुकी है. आखिरी बार इस कंपनी ने 2016 में मुनाफा दिखाया था, उसके बाद से ही ये घाटे में है. फिलहाल इसका शेयर प्राइस 0.90-0.91 के आसपास है और मार्केट कैप महज 240-265 करोड़ रुपये ही है. एक समय में टेलीकॉम सेक्टर का सरताज अब कर्ज और गलत फैसलों की नज़ीर बन चुका है. 

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RELIANCE INFRASTRUCTURE 

ALL TIME HIGH: ₹2,641

FALL FROM ATH: 96%

अनिल अंबानी की एक और कंपनी जो कर्ज और मिसमैनेजमेंट की एक क्लासिक कहानी है. नाम है रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, जो एक अपने दौर में इंफ्रा और पावर सेक्टर का बड़ा नाम थी.ये कंपनी भी निफ्टी का हिस्सा रही है. मुंबई मेट्रो, BSES, रोड प्रोजेक्ट्स और डिफेंस में कंपनी ने मजबूत पोजीशन बनाई. 2007-08 के बूम में शेयर 2,641 तक के ऑल टाइम हाई पर भी पहुंचा. 

कंपनी तेजी से विस्तार कर रही थी, इसलिए लोग इसे मल्टीबैगर मान रहे थे. मगर, इसके साथ भी वही हुआ जो अनिल अंबानी की दूसरी कंपनियों के साथ हुआ. प्रोजेक्ट्स के लिए उठाए गए भारी कर्ज, प्रोजेक्ट्स की डिलिवरी में देरी, 2008 की मंदी, इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में स्लोडाउ ने रिलायंस इंफ्रा को तबाही की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया. दरअसल, देखा जाए तो पूरे ग्रुप में ही दिक्कतें थीं, इसलिए इससे जुड़ी कंपनियां एक के बाद एक ढहने लगीं. 

एक जमाने में इंफ्रा किंग रिलायंस इंफ्रा अब अपने ऑल टाइम हाई से 96%+ वैल्यू खो चुका है. फिलहाल ये शेयर 93-94 के आसपास ट्रेड कर रहा है और मार्केट कैप महज 3,800-4,000 करोड़ रह गई है, जो कभी 20,000-25,000 करोड़ रुपये हुआ करती थी. 

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JET AIRWAYS 
ALL TIME HIGH: 1,380
FALL FROM ATH: 97%

एक ज़माने में भारत के आसमान पर राज करने वाली जेट एयरवेज अब ज़मीन की धूल बन चुकी है. प्रीमियम एयरलाइन, फुल सर्विस किंग जेट एयरवेज निफ्टी का भी हिस्सा रही. फरवरी 2005 में 
IPO लेकर आई, इश्यू प्राइस था 1,100 रुपये था. इसने आगे जाकर 1,380 रुपये का ऑल टाइम हाई भी बनाया. जेट एयरवेज ग्रोथ की नई इबारत लिख रहा था. 

मगर, बढ़ते कंपटीशन, मिसमैनेजमेंट, 2008 की मंदी, ईंधन की लागत से एविएशन का आसमान जेट एयरवेज के लिए सिकुड़ता चला गया. 2019 में कंपनी का कामकाज बंद हुआ, कंपनी निफ्टी से बाहर हो गई. NCLT में दिवालिया कार्रवाई शुरू हुई. जालान-कालरॉक कंसोर्शियम का रिवाइवल प्लान बार बार फेल हुआ. सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में लिक्विडेट करने का आदेश दिया और कभी आसमान का चमकता सितारा अब जमीन पर धूल खा रहा है. जेट एयरवेज अपने ऑल टाइम हाई से 97%+ वैल्यू खो चुका है. अब कामकाज नहीं करता है. 
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SUZLON ENERGY 
ALL TIME HIGH: ₹422
FALL FROM ATH: 90%

एक समय भारत की रिन्यूएबल एनर्जी की शान रही Suzlon Energy ने 2005-06 में लिस्टिंग के बाद 2008 के बुल रन में 422 रुपये का ऑल टाइम हाई छुआ था. विंड एनर्जी सेक्टर की ग्रोथ स्टोरी का पोस्टर बॉय मानी जाने वाली इस कंपनी ने आक्रामक विस्तार और विदेशी अधिग्रहण के जरिए तेजी से कारोबार बढ़ाया. 

इसके फाउंडर तुलसी तांती को भारत का "पवन पुरुष" और "ग्रीन एनर्जी किंग" की संज्ञा दी जाती थी, मगर भारी कर्ज, 2008 की ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस और बढ़ते कंपटीशन ने कंपनी को खोखला कर दिया. कई सालों तक कंपनी घाटे में रही. अपने पीक पर इसका मार्केट कैप 60,000-70,000 करोड़ रुपये हुआ करता था. फिलहाल 58,000 करोड़ रुपये के पास है. 

एक जमाने में विंड पावर का गौरव रही अब अपने ऑल टाइम हाई से 90%+ वैल्यू खो चुकी है. फिलहाल शेयर 43 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा है. यानी Suzlon Energy भी wealth destroyer की लिस्ट में है, लेकिन ग्रीन एनर्जी को लेकर दुनिया में तेजी से बदलाव हो रहा है, इससे कुछ कमबैक की उम्मीद अभी बाकी है. 
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UNITECH 
ALL TIME HIGH: ₹541
FALL FROM ATH: 99%

साल 2007 के दौरान जब देश में रियल एस्टेट अपने बूम पर था, तब यूनिटेक का नाम सबकी जुबां पर था. ये अक्टूबर 2007 में निफ्टी50 का हिस्सा बनी. इसने 541 रुपये का ऑल टाइम हाई बनाया. इसके साथ भी वही हुआ, 2008 की मंदी की मार से रियल एस्टेट इंडस्ट्री चरमरा गई. यूनिटेक कर्ज में डूब गई. प्रोजेक्ट्स अटक गए, कानूनी पचड़ों में फंस गई. 2017 से इनसॉल्वेंसी की प्रक्रिया शुरू हुई. यूनिटेक अब अपने ऑल टाइम हाई से 99%+ वैल्यू खो चुका है. फिलहाल शेयर 4.9-5 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा है. और मार्केट कैप सिर्फ 1,300-1,320 करोड़ रह गई है. 

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MTNL
ALL TIME HIGH: ₹2,230
FALL FROM ATH: 90%

एक ज़माने में सरकारी टेलीकॉम दिग्गज MTNL निफ्टी का हिस्सा थी. 2000s की शुरुआत में मोनोपॉली जैसी पोजीशन और सरकार के हाथ से शेयर का भाव 2,230 रुपये तक पहुंचा. अपने पीक पर मार्केट कैप हजारों करोड़ में था. लोग इसे स्टेबल PSU स्टॉक मानते थे. 

मगर, फिर प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों ने बाजार में एंट्री मारी. जियो, एयरटेल ने अपनी सर्विसेज से इस सरकारी कंपनी को काफी नुकसान पहुंचाया, सब्सक्राइब छीने, मार्केट शेयर छीना. नतीजा ये हुआ कि कंपनी की कमाई घटती चली गई. कंपनी पर तकरीबन 35,000-36,000 करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ गया. अब MTNL अपने ऑल टाइम हाई से 90%+ वैल्यू खो चुकी है. फिलहाल शेयर 30 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा है, मार्केट कैप महज 1,900 करोड़ रुपये रह गया है. 

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JAIPRAKASH ASSOCIATES 
ALL TIME HIGH: ₹399
FALL FROM ATH: 99%

एक ज़माने में इंफ्रा और रियल एस्टेट का बड़ा नाम था Jaiprakash Associates (Jaypee Group). ये 2009 में IDFC की जगह निफ्टी में शामिल हुई. 2007-08 के रियल एस्टेट बूम में कई आक्रामक प्रोजेक्ट्स लेकर आई थी. जैसे- यमुना एक्सप्रेसवे, हाइड्रो पावर. इससे शेयर 399 रुपये के ऑल टाइम हाई तक पहुंचा. 

मगर, इसका भी वही हाल हुआ जो 2008 की मंदी में बाकी रियल एस्टेट कंपनियों का हुआ था. कंपनी दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है. कंपनी अब अपने ऑल टाइम हाई से 99%+ वैल्यू खो चुका है. फिलहाल शेयर 2.95 रुपये के आस-पास रेड कर रहा है, कभी हजारों करोड़ रुपये का मार्केट कैप था अब महज 720 करोड़ रुपये के करीब है. 

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। इसमें जिन शेयरों और कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे उनके पिछले प्रदर्शन और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते। निवेश से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेनी चाहिए या खुद स्वतंत्र रिसर्च करनी चाहिए। लेखक किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

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