AI में लगा आपका पैसा कितना सुरक्षित है? क्या एक और बबल फूटने का समय आ गया है?

 AI में लगा आपका पैसा कितना सुरक्षित है?  क्या एक और बबल फूटने का समय आ गया है?

क्या आपने कभी माइकल बरी (Michael Burry) का नाम सुना है, ये वही भाई साहब हैं जिन्होंने अमेरिका में 2008 के हाउसिंग क्रैश की भविष्यवाणी की थी और इस पर एक फिल्म भी बनी थी The Big Short. अब इन्होंने एक और भविष्यवाणी कर दी है, AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को लेकर. बरी का कहना है कि AI एक बबल है, जो फटने को है और इसके केंद्र में है AI का पोस्टर बॉय Nvidia.  
Your AI Investments at Risk? AI is a Bubble Ready to Pop; Michael Burry Says Nvidia is the 'New Cisco'



Nvidia के शेयरों में तेजी, ये सिर्फ AI बबल है
माइकल बरी कहते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के शेयरों में आसमान छूती तेजी बनावटी है, खासतौर पर Nvidia के शेयरों में, और ये फाइनेंशियल बबल है इससे ज्यादा कुछ नहीं. जैसा कि हमने 1990 के अंत में और 2000 की शुरुआत में डॉट कॉम बबल के दौरान देखा था. माइकल का कहना है कि इस वक्त AI को लेकर जो पागलपन दिख रहा है, बेशुमार और अंधाधुंध पैसा बहाया जा रहा है उसकी वजह से कंपनियों के शेयर हद से ज्यादा ऊपर चढ़ गए हैं, जबकि असल में इन कंपनियों के मुनाफे को देखें तो उस शेयर में ऐसा कुछ नहीं है. इसलिए मेरी नजर में ये सिर्फ 'AI बबल' ही है. 

डॉट कॉम बूम के दौरान चार लार्ज कैप कंपनियों का बोलबाला था, सबकुछ इन चार कंपनियों के इर्द-गिर्द घूम रहा था-माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल, डेल और Cisco. इसी तरह आज के समय में मौजूदा AI बूम की लगाम पांच कंपनियों के हाथ में है. माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, मेटा, अमेज़न और ओरेकल. 

AI क्यों एक बबल है, समझिए 
AI क्यों एक बबल है, इसको समझाने के लिए माइकल Nvidia की तुलना Cisco से करते हैं, जो कि डॉट कॉम क्रैश के केंद्र में रहा था. अब माइकल ने Cisco को ही क्यों चुना? इसका लॉजिक बहुत आसान तरीके से देते हैं - डॉट कॉम बूम के दौरान सिस्को ने कभी भी लोगों को इंटरनेट नहीं बेचा था, उसने इंटरनेट सर्विसेज में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बनाए और बेचे, जिसे अंग्रेजी में 'picks and shovels' कहा जाता है. सिस्को ने फिजिकल हार्डवेयर बनाए जैसे कि राउटर्स, स्विच वगैरह, जिसका इस्तेमाल इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर को खड़ा करने के लिए जरूरी होता है. इसी के दम पर सिस्को की मार्केट वैल्यू बढ़ती चली गई. 1995 और 2000 के बीच इस टेक कंपनी के शेयरों में 3,800% की छप्परफाड़ ग्रोथ देखने को मिली थी, जिसके दम पर करीब 560 बिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ ये दुनिया की सबसे वैल्युएबल कंपनी बन गई थी, लेकिन फिर साल 2,000 के आखिर के आते आते इसके शेयर 80% से ज्यादा टूट गए.   

अब आज के AI बूम को देखिए, Nvidia इसके केंद्र में है, ये कोई सॉफ्टवेयर नहीं बेचती है बल्कि AI के लिए उपकरण (cks and shovels) बेचती है. जैसे बेहद पावरफुल GPU (चिप्स) बनाती है, जिसका इस्तेमाल माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और OpenAI जैसी कंपनियां अपने AI मॉडल को ट्रेनिंग देने के लिए करती हैं. अब ऐसे में Nvidia के शेयरों की वैल्यू में जबरदस्त उछाल देखने को मिला और ये दुनिया की सबसे वैल्युएबल कंपनी बन गई. 

इसलिए माइकल बरी कहते हैं कि AI बूम के साथ इतिहास खुद को दोहरा रहा है, लेकिन अबकी बार सिस्को की जगह Nvidia केंद्र में है. 25 साल पहले जैसे सिस्को रिकॉर्ड मार्केट कैप के साथ दुनिया की सबसे वैल्युएबल कंपनी बनी थी, अब उस जगह Nvidia बैठी है. जिसकी वैल्युएशन 5 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गई है. 

आपस में चल रहा है निवेश का खेल
अच्छा ये चिंता सिर्फ माइकल बरी को ही नहीं है, Nvidia की वैल्युएशंस को देखकर मॉर्गन स्टैनली की चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर लीजा शैलेट के माथे पर भी बल पड़ गए हैं. वो भी इसको सिस्को मोमेंट करार दे चुकी हैं. वो कहती हैं कि AI के इस खेल में सारी कंपनियां एक दूसरे से जुड़ी हुईं हैं. वो एक चक्र बनाकर आपस में ही निवेश-निवेश खेल रही हैं. जैसे कि सितंबर में Nvidia ने कहा कि वो OpenAI में 100 मिलियन डॉलर का निवेश करेगी, और 10 बिलियन डॉलर Anthropic में निवेश करेगी. बदले में, Anthropic माइक्रोसॉफ्ट के Nvidia-पावर्ड Azure क्लाउड प्लेटफ़ॉर्म पर अपने क्लाउड AI मॉडल को बढ़ाने के लिए 30 बिलियन डॉलर का निवेश करेगी. लगातार हो रहे निवेश ने AI कंपनियों का एक बड़ा सा ग्रुप बना दिया जो आपस में ही करोड़ों डॉलर का लेन-देन कर रहे हैं. 

माइकल बरी को फिक्र इस बात की है कि टेक कंपनियां माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और अमेजन AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर करोड़ों रुपये खर्च करने की बात कर रही हैं, जिसकी वजह से Nvidia के शेयरों को पंख लग गए हैं, सवाल ये है कि कंपनियां क्या कभी भी इस भारी भरकम निवेश से AI सर्विसेज देकर कमाई या मुनाफा कमा पाएंगी. माइकल Circular Financing को लेकर भी सवाल खड़े करते हैं, जिसका जिक्र लीजा शैलेट ने भी किया. Circular Financing का मतलब ये हुआ कि पैसा एक ही बड़े समूह या कंपनियों के बीच गोल-गोल घूम रहा है, जिससे यह लगता है कि बाजार में बहुत तेज़ी से ग्रोथ हो रही है, जबकि सच्चाई ये है कि वास्तव में कोई नया या बाहरी पैसा आ ही नहीं रहा है, सब बस एक दूसरे की पीठ खुजा रहे हैं.  

सबसे बड़ी चिंता
टेक इंडस्ट्री की दिक्कत ये है कि AI-चिप्स जैसे हार्डवेयर जल्दी पुराने हो जाते हैं, टेक्नोलॉजी बहुत तेजी से बदलती है. इसलिए भले ही कंपनियां अभी बड़ा निवेश कर रही हों, फिर भी डिमांड या उपयोगिता में भारी गिरावट का जोखिम बना रहता है. बरी का मानना ​​है कि मौजूदा वैल्युएशन इस जोखिम का ठीक से हिसाब नहीं लगाते हैं. चिंता सिर्फ एक कंपनी की नहीं है, डिमांड या प्रॉफिटेबिलिटी साबित होने से पहले ही ढेर सारा पैसा, प्रचार और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है, अगर डिमांड पूरी नहीं होती है, तो कई निवेशों का मूल्य कम हो सकता है.

अब ये AI बबल है या नहीं, माइकल बरी एक बार फिर सही साबित होंगे या नहीं, गब्बर सिंह की तरह- 'हमको कुछ नहीं पता'. हमको सिर्फ इतना पता है कि अगर ये हुआ, तो जिन लोगों की AI की वजह से नौकरियां गईं, उनके दिल से दुआएं निकलेंगी. 


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