ट्विटर या X पर एक बड़ी दिलचस्प चीज को लेकर बहस छिड़ती हुई दिखी. हुआ यूं कि Perplexity AI के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) अरविंद श्रीनिवास ने एक पोस्ट डाली, जिसमें उन्होंने ये बताया कि अमेरिका के राजनेताओं की शेयर बाजार में कितनी होल्डिंग है यानी किसी कंपनी के उनके पास कितने मैल्यू के शेयर हैं. इसकी जानकारी Perplexity Finance पर आ गई है.
इसके नीचे उन्होंने एक स्क्रीनशॉट की फोटो भी डाली. जिसमें अमेरिका के कुछ बड़ी राजनैतिक हस्तियों के नाम थे. जैसे नैंसी पेलोसी, एड केस, लॉरेल एम ली और कई लोग भी थे. जिसमें ये दिखाया गया था कि इन राजनेताओं की एप्पल में न्यूनतम और अधिकतम होल्डिंग कितनी है. इसे राजनीतिक स्टॉक डिस्क्लोजर को ज्यादा पारदर्शी और रिटेल निवेशकों के लिए ज्यादा आसान बनाने के लिए पेश किया गया है.
यहां तक तो ठीक था, फिर एक दूसरा पोस्ट दिखा जिसमें उन्होंने लिखा कि भारतीय राजनेताओं की भारतीय शेयर बाजार में कितनी होल्डिंग है, ये भी कुछ हफ्तों में आने वाला है. इसने X पर बहस छेड़ दी. मुद्दा ही ऐसा था. लोगों की दिलचस्पी इस बात को लेकर थी कि Perplexity AI राजनेताओं की शेयर बाजार में उनकी होल्डिंग का डेटा एक्सेस कैसे करेगा. क्योंकि भारत में राजनेता अपनी कमाई और संपत्तियां छिपाते ज्यादा और दिखाते कम हैं.
अमृत नाम के एक शख्स ने प्लेटफॉर्म पर जो कुछ पूछा वो कुछ ऐसे सवाल थे, जो किसी के जेहन में बड़ी आसानी से आ सकते है.
- भारतीय नेता क्या ट्रेड कर रहे हैं मैं कैसे ट्रैक कर सकता हूं
- मैं वही करना चाहता हूं जो अमेरिकियों ने नैंसी पेलोसी के साथ किया और उनके ट्रेड से फायदा उठाया
- मुझे पता है कि जब चुनाव आता है तब वो अपने स्टॉक को लेकर जानकारियां देते हैं, लेकिन सामान्य दिनों में मैं ये कैसे जान सकता हूं.
इस सवाल से एक बात तो साफ है कि लोग जानते हैं कि नेता कभी घाटे का सौदा नहीं करेगा, वो उसी कंपनी में पैसे लगाएगा जिसमें उसको मुनाफा होगा और किस कंपनी को फायदा होगा, ये इस बात पर निर्भर है कि कंपनी का अगला कदम क्या होगा, क्या वो कोई नई फैक्ट्री लगाने वाली है, कोई डील करने वाली है या फिर कोई अधिग्रहण करने वाली है, और इसकी जानकारी किसी सामान्य व्यक्ति को वक्त से पहले होना मुश्किल है, लेकिन किसी पहुंच वाले राजनेता के लिए ये जानकारी निकलवाना कोई मुश्किल काम नहीं है.
भारतीय डेटा जल्द होगा जारी
इसके जवाब में, श्रीनिवास ने इस बात की पुष्टि की कि Perplexity फाइनेंस जल्द ही भारतीय डेटा जारी करने की योजना बना रहा है. इसमें लिस्टेड कंपनियों में सांसदों की ओर से घोषित निवेश तक एक्सेस मिल सकेगा और यूजर्स को राजनीतिक गतिविधि और शेयर ओनरशिप के बीच संभावित ओवरलैप का एनालिसिस करने में मदद मिल सकती है. मतलब ये कि नेता जी अगर किसी कंपनी का फेवर करते पाए गए और उसी वक्त उस कंपनी में उनकी होल्डिंग भी बढ़ती गई तो भईया... ये पब्लिक है सब जानती है.
देखिए अमेरिका में अभी क्या है कि निवेशक नैतिकता नियमों के तहत दर्ज किए गए सार्वजनिक खुलासों के आधार पर राजनेताओं के लेन-देन पर नजर रखते हैं. ये डिस्क्लोजर मार्केट की जानकारी का एक स्रोत बन गए हैं, जहां कुछ ट्रेडर्स मार्केट में बड़ी पोजीशन के लिए जाने जाने वाले सांसदों की ओर से किए गए ट्रेड्स को कॉपी करते हैं.
Perplexity की कोशिश तो अच्छी लेकिन मेरा मानना है कि अमेरिका और भारत में बहुत फर्क है. X पर कई लोगों ने इस बात को भी कहा है कि राजनेताओं के पास तो करोड़ों की बेनामी प्रॉपर्टीज में निवेश करते हैं, कई तो ऐसे होते हैं जो शेयर बाजार में किसी और के नाम से भी निवेश करते हैं. राजनेता अक्सर रिश्तेदारों, ट्रस्टों या छिपे नामों से निवेश करते हैं.पब्लिक डिस्क्लोजर में ये दिखते ही नहीं.
भारत-अमेरिका में अंतर
एक बात और कि अमेरिका में राजनेताओं को शेयरहोल्डिंग का डेटा समय समय पर बताना होता है, लेकिन भारत में ऐसा कोई कानून नहीं है, वो तो हर पांच साल में चुनाव के वक्त ही ये डिस्क्लोज करते हैं कि उनके निवेश कहां कहां है. ऐसे में डेली बेसिस पर डेटा अपडेट कैसे मिलेगा, ये कैसे पता चलेगा कि किसी नेता ने आज किसी कंपनी के कितने शेयर खरीदे हैं या बेचे हैं. ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिसके जवाब Perplexity को देने चाहिए.
देखिए भारत में कोई भी नेता चाहे वो कोई सासंद हो या विधायक, कभी नहीं चाहेगा कि पब्लिक को उनकी संपत्तियों, निवेश के बारे में पता चले. तो हो सकता है कि प्राइवेसी का हवाला देकर ये डेटा दिया ही न जाए या डेटा देने पर बैन लग जाए. ये बहुत शुरुआती विचार हैं. इसलिए अभी देखना होगा कि जब Perplexity ये फीचर भारत में लॉन्च करेगा तो सरकार इसको कैसे लेती है. क्या इसकी इजाजत दी जाएगी या फिर ये ठंडे बस्ते में चला जाएगा.
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