बाजार में गिरावट अक्सर हमें किसी अच्छे स्टॉक में खरीदारी का मौका देती है. पिछले आर्टिकल में मैंने 5 हाई ग्रोथ स्टॉक्स के बारे में बताया था, जो अपने साल की ऊंचाई से काफी नीचे आ चुके थे. आज मैं आपको 3 और धमाकेदार स्टॉक्स के बारे में बता रहा हूं, जो अपनी साल की ऊंचाई से नीचे आ चुके हैं. याद रहे कि ये खरीदारी या बिकवाली की राय नहीं, ये सिर्फ एक रिसर्च आधारित लेख है, जो आपकी जानकारी बढ़ाने के लिए है.
KPIT Tech
KPIT टेक्नोलॉजीज ऑटोमोटिव और मोबिलिटी इकोसिस्टम के लिए एक ग्लोबल पार्टनर है. इसमें कोई शक नहीं कि कंपनी अच्छी है. इस स्टॉक में बीते कुछ महीनों से हम गिरावट देख रहे हैं. इसके नतीजे भी मिले-जुले ही रहे हैं.
ये स्टॉक अपने 52 वीक हाई से 21% तक टूट चुका है. बावजूद इसके ये अब भी महंगा लग रहा है, क्योंकि इसका प्राइस टू इक्विटी रेश्यो 41.95 है. मगर ये पूरी तस्वीर नहीं है. कोइ स्टॉक महंगा है या सस्ता है, उसको कई कसौटियों पर देखने की जरूरत होती है. खासतौर पर तब जब कंपनी का बिजनेस अच्छा हो, मैनेजमेंट बढ़िया हो, काम की कोई कमी न हो और अपने सेक्टर में कंपनी की हैसियत अच्छी हो. तब कंपनी की ग्रोथ को लेकर कोई चिंता नहीं होती, भले ही थोड़े समय के लिए उसके शेयरों में दबाव दिखे.
इसलिए भले ही इसका PE 42 के करीब है, लेकिन इसका PEG Ratio 0.99 है. PE को हमेशा ग्रोथ के चश्मे से देखना चाहिए. अगर किसी स्टॉक का PEG 1 के आस-पास है तो इसका मतलब कि फेयर वैल्यूड है. यही बात सबसे अच्छी है, यह बताता है कि कंपनी जितनी तेजी से अपना मुनाफा बढ़ा रही है, उस हिसाब से शेयर की मौजूदा कीमत वाजिब है. IT सेक्टर के हिसाब से PE थोड़ा महंगा है, लेकिन KPIT जैसी कंपनियां जो ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर बनाती हैं, उन्हें मार्केट हमेशा प्रीमियम रेट देता है, क्योंकि इस बिजनेस में काम की कोई कमी नहीं है.
ROCE 40.9% और ROE 33% है, ये दोनों आंकड़े बताते हैं कि कंपनी अपने और शेयरधारकों के पैसे का इस्तेमाल कितनी कुशलता से कर रही है. कंपनी उन्हें बढ़िया पैसे बनाकर दे रही है.
3 साल का EPS 44.2% CAGR से बढ़ा है. सरल शब्दों में कंपनी अपने हर एक शेयर पर कितना शुद्ध मुनाफा कमा रही है. पिछले 3 सालों में KPIT का मुनाफा हर साल औसतन 44% से ज्यादा की रफ्तार से बढ़ा है. ये तो जबरदस्त की कैटेगरी में आता है.
अब समझिए कि इसका PEG रेश्यो 0.99 है, ये इतना शानदार इसलिए है क्योंकि कंपनी की यह 44% वाली ग्रोथ उसके 42 के P/E को पूरी तरह जायज ठहराती है. क्योंकि इतना जबरदस्त मुनाफा अगर कोई कंपनी बनाकर दे रही है तो जाहिर लोग उसको ऊंची कीमत पर भी खरीदेंगे. क्योंकि ग्रोथ की संभावनाएं बहुत ज्यादा हैं. यानी कंपनी महंगी नहीं है क्योंकि उसकी कमाई बढ़ने की रफ्तार बहुत तेज है.
मगर, ये स्टॉक अपने 200 DMA से नीचे ट्रेड कर रहा है. 200 DMA को मार्केट की भाषा में 'लक्ष्मण रेखा' माना जाता है. अगर ये कहें कि शेयर अभी "सुस्ती" या "मंदी" के दौर में है, तो गलत नहीं होगा. जब तक यह वापस ₹1,264 के ऊपर जाकर टिक नहीं जाता, अब देखते हैं ये कब होता है. लेकिन अक्सर अच्छे शेयर जब 20% या उससे ज्यादा गिरते हैं, तो लंबे समय के निवेशकों के लिए खरीदारी का मौका बनता है, बशर्ते कंपनी के बिजनेस में कोई खराबी न हो.
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Jupiter Life
जुपिटर लाइफ लाइन हॉस्पिटल्स हेल्थकेयर सेक्टर का एक उभरता हुआ नाम है, जिसकी ठाणे, पुणे और इंदौर जैसे शहरों में मजबूत पकड़ है. इसमें कोई शक नहीं कि कंपनी का बिजनेस मॉडल भरोसेमंद है, क्योंकि हेल्थकेयर एक ऐसा सेक्टर है जहां डिमांड हमेशा बनी रहती है. मगर बीते कुछ समय से इस स्टॉक में दबाव दिख रहा है. यह अपने ऊपरी स्तरों से टूटा है.
यह स्टॉक अपने 52-वीक हाई से 20% तक टूट चुका है. अगर आप सिर्फ इसका प्राइस टू इक्विटी (P/E) रेश्यो देखेंगे, जो कि 48.26 है, तो पहली नजर में यह स्टॉक आपको थोड़ा महंगा लग सकता है. मगर जैसा कि मैंने पहले भी बताया है कि कोइ स्टॉक महंगा है या सस्ता, उसे सिर्फ P/E के चश्मे से नहीं देखा जा सकता. हमें दूसरे पहलुओं को भी देखना होगा.
इस स्टॉक की सबसे बड़ी ताकत इसका PEG Ratio है, जो मात्र 0.85 है. 1 से कम का PEG रेशियो यह साफ संकेत देता है कि कंपनी का मुनाफा उसकी शेयर की कीमत के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है. सरल शब्दों में कहें तो, बाजार अभी इस कंपनी की भविष्य की ग्रोथ को पूरी कीमत नहीं दे रहा है, जिसका मतलब है कि यह अपनी ग्रोथ के हिसाब से ये स्टॉक कम भाव पर मिल रहा है.
ROCE 18% और ROE 15% है. हॉस्पिटल सेक्टर के बिजनेस में, जहां शुरुआती निवेश बहुत ज्यादा होता है, वहां ये आंकड़े सामान्य माने जाते हैं. देखिए हॉस्पिटल सेक्टर की ग्रोथ लीनियर होती है, बहुत ज्यादा धूम धड़ाके नहीं देखने को मिलते. यानी हम मान सकते हैं कि मैनेजमेंट अपने पास मौजूद संसाधनों और शेयरधारकों के पैसे का इस्तेमाल कुशलता से कर रहा है और संतोषजनक रिटर्न बना रहा है.
मगर तकनीकी तौर पर देखें तो, यह स्टॉक अभी अपने 200 DMA (₹1,469) से नीचे ट्रेड कर रहा है। मार्केट में 200 DMA को एक मजबूत 'सपोर्ट और रेजिस्टेंस' माना जाता है। जब तक यह शेयर वापस ₹1,470 के स्तर को पार करके उसके ऊपर नहीं टिकता, तब तक इसमें सुस्ती बनी रह सकती है. इसे हम "कंसोलिडेशन" का फेज कह सकते हैं, मतलब ये स्टॉक अभी आराम फरमा रहा है.
तो जुपिटर लाइफ के फंडामेंटल्स और 0.85 का PEG रेश्यो इसे एक आकर्षक 'ग्रोथ स्टोरी' बनाते हैं. 20% की यह गिरावट उन निवेशकों के लिए एक मौका हो सकती है जो क्वालिटी हेल्थकेयर स्टॉक्स को निचले स्तर पर लेना चाहते हैं.
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The Indian Hotels
ये हॉस्पिटैलिटी सेक्टर का एक जाना-माना और भरोसेमंद नाम है, जिसकी ताज, विवांता और जिंजर जैसे ब्रांड्स के ज़रिए देश-विदेश में मजबूत मौजूदगी है. इसमें कोई शक नहीं कि कंपनी का बिजनेस मॉडल मजबूत है, क्योंकि ट्रैवल और टूरिज्म एक ऐसा सेक्टर है जो इकोनॉमिक साइकिल के साथ-साथ लंबी अवधि में ग्रोथ दिखाता है. मगर बीते कुछ समय से इस स्टॉक में दबाव नजर आ रहा है और यह अपने ऊपरी स्तरों से फिसला है.
यह स्टॉक अपने 52-वीक हाई से करीब 18% तक टूट चुका है. पहली नजर में अगर आप इसका P/E रेश्यो देखेंगे, जो 58.45 है, तो यह बहुत ज्यादा महंगा लग सकता है. आम तौर पर 50-60 का P/E देखकर कोई भी निवेशक सोच सकता है कि शेयर की कीमत उसकी कमाई से बहुत आगे निकल गई है. लेकिन यहां दूसरे पैरामीटर्स जब पिक्चर में आएंगे तब पूरी तस्वीर साफ होगी.
इस स्टॉक की सबसे बड़ी ताकत इसका PEG Ratio है, जो कि 0.63 है. 1 से नीचे का PEG रेश्यो यह संकेत देता है कि कंपनी की कमाई की ग्रोथ, उसके मौजूदा शेयर प्राइस के मुकाबले बेहतर है. आसान शब्दों में कहें तो, बाजार अभी कंपनी की भविष्य की ग्रोथ को पूरी तरह कीमत में नहीं उतार पाया है, जिससे यह स्टॉक अपनी ग्रोथ के मुकाबले वाजिब वैल्यूएशन पर नजर आता है. मतलब, मुनाफे की रफ्तार के सामने शेयर अभी भी महंगा नहीं है.
ROCE 17% और ROE 16% है. होटल इंडस्ट्री जैसे सेक्टर के लिए, जहां प्रॉपर्टी और मेंटेनेंस में बहुत खर्च होता है, ये आंकड़े काफी संतुलित और पॉजिटिव माने जाते हैं. यह दिखाता है कि टाटा का मैनेजमेंट अपने एसेट्स से बेहतर रिटर्न निकालने में कामयाब हो रहा है.
हालांकि, तकनीकी चार्ट पर एक छोटी सी चिंता है. स्टॉक अभी अपने 200 DMA (₹743) के थोड़ा नीचे यानी ₹734 के आस-पास ट्रेड कर रहा है. मार्केट की इस 'लक्ष्मण रेखा' से नीचे होना यह बताता है कि फिलहाल शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स इस शेयर से दूरी बनाए हुए हैं और बाजार में इसे लेकर थोड़ी सुस्ती है.
The Indian Hotels एक ऐसी कंपनी है जिसका बिजनेस आने वाले सालों में टूरिज्म और शादियों के बढ़ते सीजन के साथ और चमकने वाला है. 0.63 का शानदार PEG रेशियो यह चीख-चीख कर कह रहा है कि लंबी अवधि के लिए यह एक बेहतरीन 'वैल्यू पिक' हो सकता है. जैसे ही यह स्टॉक ₹745-₹750 के ऊपर निकलकर टिकना शुरू करेगा, ये वापसी कर सकता है.
ऊपर जिन स्टॉक्स को लेकर चर्चा की गई है, ये किसी भी तरह से खरीदने या बेचने की राय नहीं है, ये सिर्फ डेटा पर आधारित विश्लेषण है. कृपया निवेश से पहले अपने निवेश सलाहकार से संपर्क करें.
Insta - Mehrotra Sumit (@sumitresearch)




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