Mexico Tariff: मैक्सिको का 50% टैरिफ भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए बुरी खबर! किस सेक्टर पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
अभी अमेरिका टैरिफ झटकों से उबर भी नहीं हैं कि मैक्सिको ने भी भारत एक एक्सपोर्ट पर 50 परसेंट का टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है. मैक्सिको की संसद ने एशिया से आने वाले 1,400 प्रोडक्ट्स पर 5% से लेकर 50% टैरिफ लगाने का एक बिल पास किया है, इसमें भारत, चीन, दक्षिण कोरिया, थाइलैंड, इंडोनेशिया जैसे देशों के सामान शामिल हैं जिनके साथ मेक्सिको का कोई फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट नहीं है. नई दरें 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना है. ये टैरिफ टेक्सटाइल, ऑटो, ऑटो पार्ट्स, प्लास्टिक और स्टील जैसे प्रोडक्ट्स पर अगले साल से लगेगा.
मैक्सिको के साथ भारत का कितना ट्रेड
मैक्सिको में भारत की करीब 200 कंपनियां ट्रेड करती हैं, कई के वहां पर प्लांट्स हैं, तो कई अपना माल एक्सपोर्ट करती हैं यानी उनका एक्सपोजर है. जबकि मैक्सिको की 17 कंपनियां हैं जो भारत में हैं. भारत का मैक्सिको के साथ ट्रेड सरप्लस है, यानी भारत एक्सपोर्ट ज्यादा करता है और इंपोर्ट कम. जैसे - साल 2023-24 में भारत का एक्सपोर्ट 5.3 बिलियन डॉलर था, जबकि इंपोर्ट 3.1 बिलियन डॉलर था, यानी कि 2.2 बिलियन डॉलर का ट्रेड सरप्लस था, जो कि साल 2024-25 में बढ़कर 2.8 बिलियन डॉलर पहुंच गया.
2024 में 11.7 बिलियन डॉलर ट्रेड के साथ भारत मेक्सिको का 9वां सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर था. इसलिए भारत के लिए मैक्सिको एक बड़ा बाजार है, खासतौर पर ऑटो सेक्टर के लिए. इसके अलावा
फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स, इलेक्ट्रिक मशीनरी, केमिकल प्रोडक्ट्स और एल्युमीनियम का भी बड़ा एक्सपोर्ट होता है, तो जाहिर है कि इससे जुड़ी कंपनियों पर असर पड़ेगा.
IT कंपनियां
लगभग सभी बड़ी भारतीय IT और ICT कंपनियों के मेक्सिको में ऑपरेशंस हैं, जैसे- TCS, HCL, Infosys, Tech Mahindra, First Source, Cognizant, NIIT, Aptech, Hexaware, Wipro, BirlaSoft, Zoho वगैरह. Zoho Corp ने फरवरी 2024 में मेक्सिको में अपना पहला ऑफिस खोला है.
फार्मा कंपनियां
कई भारतीय फार्मा कंपनियों ने मेक्सिको में निवेश और ऑपरेशंस स्थापित किए हैं, जैसे- Lupin, Dr. Reddy’s Laboratories, Zydus, Claris Life Sciences, Hetero Drugs, Sun Pharma, और Solara.
ऑटो सेक्टर
मैक्सिको के टैरिफ बढ़ाने का सबसे बड़ा झटका ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को लगेगा. क्योंकि ड्यूटी 20% से बढ़कर 50% हो जाएगी. भारत से मेक्सिको को 2024-25 में लगभग 1.86 बिलियन डॉलर के वाहन एक्सपोर्ट हुए, जिसमें से 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा पर सीधे असर पड़ेगा इसके अलावा, ऑटो कंपोनेंट्स एक्सपोर्ट जो कि 850 मिलियन डॉलर का है, इस पर भी असर पड़ने की आशंका है. जो पावरट्रेन, चेसिस, ब्रेक सिस्टम, ड्राइवलाइन वगैरह शामिल है. 2024-25 में Volkswagen, Hyundai, Maruti Suzuki का ज्वाइंट एक्सपोर्ट वैल्यू लगभग 1.1 बिलियन रहा था, जिसमें 90,000 यूनिट्स गाड़ियां एक्सपोर्ट की गई थीं, ये निर्यात मेक्सिको के बाजार के लिए हैं, और टैरिफ से इन पर असर पड़ने की आशंका है.
एक नजर डालते हैं कि मैक्सिको में किन ऑटो कंपनियों का कामकाज है
- टाटा ग्रुप ने Titan X नाम से अप्रैल 2024 में मेक्सिको में एक ऑटो कूलिंग पार्ट्स फैब्रिकेशन प्लांट खोला है.
- Sakthi Group मैक्सिको के दुरंगो (Durango) में ऑटो पार्ट्स सेक्टर में निवेश कर रहा है
- मदरसन टेक्निकल प्रिसिजन मेक्सिको के मेक्सिको में 15 प्लांट हैं
- भारत की सबसे बड़ी 2-व्हीलर कंपनी हीरो मोटोकॉर्प का जनवरी 2021 से ग्रुपो सालिनास के साथ डिस्ट्रीब्यूशन एग्रीमेंट है.
- JK Tyre मैक्सिको में 3 मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स को ऑपरेट करता है. इसने 2008 में मैक्सिको की टायर कंपनी Tornel को खरीदा था.
अन्य सेक्टर्स
इसके अलावा कई और सेक्टर्स भी हैं जहां पर भारत का दबदबा है, जिन पर टैरिफ बढ़ने का असर दिख सकता है.
एल्युमीनियम: भारत से मेक्सिको के लिए एल्युमीनियम का बड़ा एक्सपोर्ट होता है, जिसको रिप्लेस करना मैक्सिको के लिए मुश्किल होगा. भारत ने 2024 में 189 मिलियन डॉलर मूल्य के एल्युमीनियम उत्पादों का एक्सपोर्ट किया था, जो मेक्सिको के कुल एल्युमीनियम इंपोर्ट का 53% है.
सिरेमिक टाइल: भारत ने लगभग 100 मिलियन डॉलर मूल्य की टाइलों का एक्सपोर्ट किया, जिसने फिर से मेक्सिको के आधे से ज्यादा मार्केट पर कब्जा कर लिया
फूड प्रोसेसिंग: Parle-G पूरे अमेरिका महाद्वीप में अपनी एकमात्र मैन्युफैक्चरिंग प्लांट मेक्सिको में चला रही है
एग्री टेक: UPL Ltd ने मेक्सिको के साल्टिलो में एक रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर और मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में 11 मिलियन डॉलर का निवेश किया है
पैकेजिंग: UFLEX Ltd की सब्सिडियरी Flex Americas मैक्सिको में अपना विस्तार कर रही है.
अब देखना ये है कि सरकार और ये कंपनियां मैक्सिको के इस टैरिफ फैसले के बाद अपनी रणनीति में क्या बदलाव करती हैं, क्योंकि कई कंपनियों की योजना पहले ये थी कि अमेरिका के टैरिफ से बचने के लिए मैक्सिको रूट का इस्तेमाल किया जाएगा, लेकिन अब ये रास्ता भी बंद होता हुआ दिख रहा है. खासतौर पर ऑटो कंपनियों के लिए जो कि इस ट्रेड का एक बड़ा हिस्सा है.
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