अपने ही बनाई रेस में कैसे पिछड़ गई OLA? हाइप से हकीकत की कहानी...

ओला इलेक्ट्रिक के फाउंडर और प्रमोटर भाविश अग्रवाल ने 17 दिसंबर को कंपनी में 4.2 करोड़ शेयर्स करीब 142.3 करोड़ रुपये में बेच दिए हैं. ये ब्लॉक डील 33.96 रुपये प्रति शेयर के भाव पर गई है. ये स्टेक सेल 2.78% हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया के तहत की गई है. जो कि पहले से तय थी. यह बिक्री प्रमोटर लेवल पर 260 करोड़ रुपये के लोन को चुकाने और गिरवी रखे शेयर्स को रिलीज करने के लिए की गई है. इसके पहले 16 दिसंबर को इस डील का पहला ट्रांच पूरा हुआ था, जिसमें अग्रवाल ने बल्क डील के जरिए 0.6% हिस्सेदारी करीब 2.6 करोड़ शेयर्स बेचे थे, जो कि  लगभग 92 करोड़ रुपये में बेचे गए थे. इन दो चरणों में की गई डील से 234 करोड़ रुपये मिले हैं. इससे सभी गिरवी शेयर्स रिलीज हो गए और प्रमोटर ग्रुप की होल्डिंग करीब 34% रह गई है. 

How Ola Electric Lost Market Leadership Real Reason Behind Decline

ओला जो इस ऐसे दौर से गुजर रही है कि लोन चुकाने के लिए प्रमोटर को अपनी हिस्सेदारी बेचने पड़ रही है, तो सवाल तो बनता है कि ओला को आखिर हुआ क्या है? इस नौबत तक पहुंची कैसे.

ये अपने आप में एक क्लासिक केस स्टडी है. भारत में जब इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर की बात शुरू हुई, तो एक नाम सबसे ऊपर था, Ola Electric, जिस कंपनी को कभी EV का फ्यूचर, भारत की Tesla on two wheels और पेट्रोल से चलने वाली टू-व्हीलर्स कंपनियों के लिए खतरा कहा गया, आज वही कंपनी अपने ही बनाए बाजार में संघर्ष करती दिख रही है. यह बदलाव किसी एक तिमाही का नहीं है. यह कहानी है धीरे-धीरे जमीन खिसकने की, लगातार मार्केट खोते जाने की, बिक्री के गिरते ग्राफ और लेगेसी कंपनियों के पलटवार की. 

भारत में जब इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर की बात शुरू हुई, तो एक नाम सबसे ऊपर था, Ola Electric, जिस कंपनी को कभी EV का फ्यूचर, भारत की Tesla on two wheels और पेट्रोल से चलने वाली टू-व्हीलर्स कंपनियों के लिए खतरा कहा गया, आज वही कंपनी अपने ही बनाए बाजार में संघर्ष करती दिख रही है. यह बदलाव किसी एक तिमाही का नहीं है. यह कहानी है धीरे-धीरे जमीन खिसकने की, लगातार मार्केट खोते जाने की, बिक्री के गिरते ग्राफ और लेगेसी कंपनियों के पलटवार की. 

जब Ola थी EV बूम का पोस्टर बॉय

2022–23 का दौर Ola Electric के लिए सुनहरा था। भारत के EV टू-व्हीलर बाजार का बेताज बादशाह, जिसकी 25% से 35% तक की हिस्सेदारी थी। कई महीनों तक ये देश का नंबर वन 2-व्हीलर ब्रांड भी रहा। Ola Electric के IPO से पहले ही ये मान लिया गया कि देश की EV क्रांति का सबसे बड़ा फायदा Ola को ही मिलेगा। एक स्टार्ट-अप होते हुए भी Ola ने TVS, Bajaj, Hero जैसी लेगेसी कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी।

लेकिन 2024 के अंत आते-आते तस्वीर बदलनी शुरू हो गई. दिसंबर 2024 में ही ओला का मार्केट शेयर 18.7% तक गिर गया, कंपनी सिर्फ 13,769 यूनिट्स बेच पाई और पहली बार टॉप पोजीशन गंवा दी, बजाज ऑटो (25% शेयर, 18,276 यूनिट्स) नंबर-1 और TVS मोटर (23.48% शेयर, 17,212 यूनिट्स) नंबर-2 पर आ गए. जून 2024 में जिसका शेयर 49% था, वो साल के अंत तक आधे से भी कम हो गया. 2025 में यह गिरावट और तेज हो गई.

कैसे रेस से बाहर होती चली गई ओला

ओला इलेक्ट्रिक ने लॉन्च के पहले पांच सालों के भीतर 3 बिलियन डॉलर की वैल्यूएशन हासिल की थी. अमेरिकी वेंचर कैपिटल फर्म टाइगर ग्लोबल और जापानी निवेश दिग्गज सॉफ्टबैंक जैसे बड़े-बड़े निवेशकों ने ओला की ग्रोथ स्टोरी पर दांव लगाया. ओला भारत के 2-व्हीलर मार्केट की ड्राइविंग सीट पर बैठना चाहती थी. EV को लेकर देश में नई हवा बह रही थी. ओला बाजार की उम्मीदों पर सवार होकर हवा से बातें कर रही थी.   

लेकिन ये बहुत दिन तक नहीं चला, साल 2024 के आखिर आते आते और 2025 की शुरुआत में समय ने करवट ली और हालात बदल गए. दिसंबर 2025 तक कंपनी की मार्केट कैप करीब 1.5-1.6 बिलियन डॉलर (लगभग 15,000-16,000 करोड़ रुपये) के आसपास रह गई है, जो शेयर प्राइस में लगातार गिरावट की वजह से थी. नवंबर 2025 में बिक्री साल-दर-साल 71% गिरकर महज 8,400 यूनिट्स पर आ गई, जिससे मार्केट हिस्सेदारी 20% के नीचे फिसल गई, जो कि पूरे साल 2024 के दौरान 35% तक हुआ करती थी.

जो कंपनी हर महीने नंबर-1 पोजीशन पर रहती थी, वो दिसंबर में तीसरे पायदान पर फिसल गई. दिसंबर 2024 में ओला का मार्केट शेयर 18.7% रहा, इसी महीने बजाज ऑटो 25% मार्केट शेयर के साथ बन गया इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर का नया किंग. दूसरे नंबर पर रही TVS Motor मोटर जिसने 23.48% मार्केट शेयर पर अपना कब्जा जमा लिया था. 

ओला के मार्केट शेयर में ये गिरावट कोई छोटी मोटी गिरावट नहीं थी. जून 2024 में जिसका मार्केट शेयर 40% के करीब हुआ करता था, दिसंबर 2024 में आधे से भी कम होकर 19% के नीचे फिसल गया. यही वो समय था जब ओला की बिक्री में लगातार गिरावट आ रही थी और कंपनी के कई बड़े अधिकारियों ने इस्तीफा देकर कंपनी से किनारा कर लिया था. निवेशकों जैसे सॉफ्टबैंक ने अपनी हिस्सेदारी घटाई. आफ्टर-सेल्स सर्विस की शिकायतें, बढ़ते कंपटीशन और आर्थिक चुनौतियों ने ओला के नई मुश्किलें खड़ी कर दीं, जिससे कंपनी की महत्वाकांक्षाएं प्रभावित हुई. 

FADA के ताजा डेटा बताते हैं कि नवंबर 2025 में हीरो मोटोकॉर्प ने इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर सेगमेंट में बिक्री के मामले में ओला को पछाड़ दिया. हीरो ने अपने 2-व्हीलर स्कूटर Vida के दम पर नवंबर 2025 में 12,213 यूनिट्स बेचीं, जो कि सालाना आधार पर 66% से ज्यादा का उछाल है. जबकि दूसरी तरफ ओला इलेक्ट्रिक इस महीने सिर्फ 8402 स्कूटर ही बेच पाई. जो कि सालाना आधार पर 71% की गिरावट है. जिसकी वजह से ओला स्कूटर बिक्री के मामले में टॉप-4 की रेस से भी बाहर हो चुकी है और 5वें पायदान पर फिसल गई जबकि हीरो चौथे नंबर पर आ गई है. ओला की मार्केट शेयर भी गिरकर अब सिर्फ 7-8% के आसपास रह गई है. ओला की यह गिरावट सिर्फ नंबर्स की नहीं, बल्कि कस्टमर का भरोसा खोने की भी है. स्कूटर्स में क्वालिटी इश्यूज, सर्विस में देरी और शिकायतों की बाढ़ ने ग्राहकों को दूर किया. 

कौन ले रहा है ओला की जगह?

ट्रेडिशनल टू-व्हीलर कंपनियां अपनी मजबूत डीलर नेटवर्क, ब्रांड ट्रस्ट और बेहतर प्रोडक्ट्स के दम पर तेजी से आगे बढ़ रही हैं. 

1- TVS Motor (iQube): 2025 में लगातार टॉप पर. नवंबर में 30,000+ यूनिट्स, मार्केट शेयर 27%. जनवरी-नवंबर में लीडर बन चुकी है.

2- Bajaj Auto (Chetak): नवंबर में 25,000+ यूनिट्स बेचीं, मार्केट शेयर करीब 22%. सबसे तेज ग्रोथ वाली कंपनी

3- Ather Energy: नवंबर में 20,000+ यूनिट्स बेचीं. प्रीमियम सेगमेंट में मजबूत पोजीशन, शेयर 15-18% के बीच

4- Hero MotoCorp (Vida): नवंबर में 12,000+ यूनिट्स बेचकर ओला को पीछे छोड़ा. मार्केट शेयर करीब 10% है.

ये चारों कंपनियां मिलकर 2025 में 80%+ मार्केट पर कब्जा कर चुकी हैं. TVS और बजाज जैसी कंपनियां अपने पुराने नेटवर्क का फायदा उठाते हुए Tier-2/3 शहरों में तेजी से फैल रही हैं, जहां ओला की सर्विस कमजोर साबित हुई. 

ओला अब सर्विस नेटवर्क बढ़ाने और नए मॉडल्स, जैसे Roadster पर फोकस कर रहा है, लेकिन रिकवरी आसान नहीं लग रही है. 2025 का साल साबित कर रहा है कि EV मार्केट में सिर्फ पहले आने से नहीं, बल्कि क्वालिटी, सर्विस और ट्रस्ट से जीता जाता है. ट्रेडिशनल प्लेयर्स अब EV का फ्यूचर लिख रहे हैं, जबकि ओला को अपना खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी.


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