IPO में प्रमोटर्स मालामाल, रिटेलर बेहाल! OFS से पैसे जुटाने में रचा गया नया इतिहास! 2025 में जुटाए 1 लाख करोड़ रुपये
IPO में प्रमोटर्स मालामाल, रिटेलर बेहाल! OFS से पैसे जुटाने में रचा गया नया इतिहास! 2025 में जुटाए 1 लाख करोड़ रुपये
साल 2025 में कंपनियों के प्रमोटर्स और बड़े शेयरहोल्डर्स ने ऑफर फॉर सेल यानी OFS के जरिए शेयर बेचकर इतना माल कमाया है कि उनका नाम अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है. इस साल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक इन प्रमोटर्स और शेयरहोल्डर्स ने OFS के जरिए 99,500 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं, जो कि अपने आप में एक नया रिकॉर्ड है. मजे की बात ये है कि इस दौरान शेयर बाजार में वो तेजी नहीं देखने को मिली. पिछली बार साल 2024 ये आंकड़ा 95,285 करोड़ रुपये था.
अब ऐसा हो क्यों रहा है?
प्रमोटर्स और प्राइवेट इक्विटी निवेशक (PE investors) अपनी होल्डिंग बेचकर IPO के जरिए कंपनी से आसानी से बाहर निकल रहे हैं, यानी पैसा निकाल रहे हैं. ऐसा इसलिए हो पा रहा है क्योंकि मार्केट में लिक्विडिटी बहुत ज़्यादा है, यानी बाज़ार में निवेश करने के लिए बहुत पैसा उपलब्ध है. साथ ही, विदेशी निवेशक (FIIs) और भारतीय निवेशक (DIIs) लगातार पैसा लगा रहे हैं. इसलिए जब प्रमोटर्स और बड़े निवेशक IPO में अपनी हिस्सेदारी बेचते हैं, तो मार्केट में खरीदारों की कोई कमी नहीं होती, जिससे उन्हें आसानी से और अच्छे प्राइस पर एग्ज़िट मिल जाता है.
IPO के जरिए 1.6 लाख करोड़ जुटाए
इस साल भी IPO मार्केट ने नई ऊंचाईयों को छुआ है. इस साल सभी IPO मिलाकर कुल 1.6 लाख करोड़ जुटाए गए हैं, जिसने पिछले साल के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. पिछले साल IPO के जरिए 1.59 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए थे. जबकि अभी तो दिसंबर का महीना शुरू ही हुआ है और कई IPOs आने वाले हैं. जिसमें Meesho Ltd (5,421.20 करोड़ रुपये), Aequs Ltd (921.81 करोड़ रुपये) और Vidya Wires Ltd. (300 करोड़ रुपये) के IPO शामिल हैं. ये तीनों मिलकर 6,600 करोड़ रुपये जुटाएंगे. इसके अलावा 10 और भी IPO आएंगे, जिसकी वैल्यू करीब 25,000 करोड़ रुपये है. यानी 1.6 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा अभी और ऊपर जाएगा. मतलब IPO मार्केट काफी मजबूत है और निवेशकों की रुचि अभी भी बहुत ज्यादा है. कंपनियां बड़ी मात्रा में पैसा जुटाने में सफल हो रही हैं.
OFS का हिस्सा बढ़ा
एक और बात ये कि 2021 से 2025 के बीच IPO में जितना कुल पैसा जुटा, उसका लगभग दो तिहाई हिस्सा OFS से आया जो कि 3,37,000 करोड़ रुपये था. जबकि देखा जाए तो IPOs के जरिए रिटेल निवेशकों के हाथ कुछ खास नहीं लगा. 2025 में औसत लिस्टिंग गेन में गिरावट देखने को मिली है. 2023 और 2024 में जहां औसत लिस्टिंग गेन 29% और 30% रहा था, वहीं इस साल यह घटकर सिर्फ 9% रह गया है. मतलब प्रमोटर्स और शेयरहोल्डर्स ने तो जमकर माल छापा, लेकिन रिटेल निवेशक की झोली में कुछ खास नहीं आया. इक्का दुक्का IPO को छोड़ दें जिन्होंने 50% से ज्यादा रिटर्न दिए. इस साल अधिकतर IPO की लिस्टिंग्स अपनी शुरुआत के 3 से 6 महीनों के भीतर ही रिटेल निवेशकों के लिए निगेटिव रिटर्न देने लगे.
IPO को लेकर नजरिया बदला
दरअसल, IPO को देखने का नजरिया बदल रहा है. पिछले दो साल में शेयर बाजार का माहौल काफी अच्छा रहा है. इस अच्छे माहौल का फायदा उठाते हुए कई कंपनियों के प्रमोटर्स और प्राइवेट-इक्विटी (PE) फंड्स ने अपने शेयर बेचकर बड़ी मात्रा में पैसे निकाल लिए हैं, यानी माल बटोरा और कंपनी से निकल लिए. लेकिन पहले ऐसा नहीं होता था, पहले IPO मुख्य रूप से कंपनी के विस्तार और भविष्य की ग्रोथ योजनाओं के लिए पैसे जुटाने के लिए लाए जाते थे. अब ज्यादा शेयरहोल्डर्स IPO का इस्तेमाल अपने के शेयर बेचने के लिए कर रहे हैं, नए प्रोजेक्ट शुरू करना, कंपनी के ग्रोथ पर पैसा लगाने को लेकर फोकस कम रह गया है.
इसको ऐसे समझिए कि साल 2025 में जितने भी IPO आए, उनमें से 68% हिस्सा OFS का रहा है, जबकि 2024 और 2023 में यह हिस्सा 60% था. मतलब ये कि ज्यादातर IPO में पैसा कंपनी को नहीं जा रहा, बल्कि पुराने शेयरधारकों को जा रहा है, जो अपने शेयर बेच रहे हैं. हालांकि 2022 में OFS का हिस्सा 70% था और 2020 में तो यह 86% तक पहुंचा था.
खैर, IPO का चस्का पुराना है, पुराने शेयरहोल्डर्स और प्रमोटर्स तो माल बना लेंगे, लेकिन इसमें रिटेल निवेशक के हाथ अब ज्यादा कुछ लग नहीं रहा.
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Sir companies kaun se hai jaha promoter ne sab se jayada becha hai ?
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