OLA Electric अपने लाइफ टाइम हाई से 80% से ज्यादा टूट चुका है. 20 अगस्त, 2024 को इसने 157.40 रुपये का ऑल टाइम हाई बनाया था. आज की तारीख में ओला की मार्केट कैप घटते घटते 14,000 करोड़ रुपये के करीब रह गई है, जब ये स्टॉक अपने पीक पर था, तो इसकी मार्कैट वैल्यू 69,000 करोड़ रुपये के करीब थी. यानी तब से लेकर अबतक निवेशकों की 55,000 करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू साफ हो चुकी है.
ये कहानी तो आप सबको पता है, ओला ने स्टॉक मार्केट निवेशकों का बड़ा नुकसान किया है, लोग अब भी बड़ा एक्सपोजर लेकर बैठे हैं, इस उम्मीद में कि ये शेयर कभी तो ऊपर आएगा. मगर मैं यहां पर आपको कुछ दूसरी कहानी बताने जा रहा हूं. ओला ने म्यूचुअल फंड निवेशकों को भी चोट पहुंचाई है. वो कैसे? वो ऐसे कि कई म्यूचुअल फंड्स का ओला में एक्सपोजर है. जिन टॉप 5 नामों का जिक्र मैं नीचे कर रहा हूं, उनमे से 4 तो मोतीलाल ओसवाल के ही हैं, जबकि एक HDFC का है.
Motilal Oswal के कुछ स्पेशलाइज्ड या थीमैटिक फंड्स, जैसे स्पेशल ऑपर्चुनिटी, मैन्युफैक्चरिंग, ELSS, लार्ज एंड मिडकैप में एक्सपोजर 2.03% से लेकर 2.98% तक है. क्योंकि वो ग्रोथ या EV थीम पर फोकस करते हैं. ओला के शेयर में इतनी गिरावट के बावजूद ये फंड्स इसे होल्ड कर रहे हैं, शायद लॉन्ग-टर्म EV ग्रोथ पर उनको भरोसा है. HDFC ट्रांसपोर्टेशन का ओला में एक्सपोजर AUM का 1.39% है.
इस आंकड़े से एक बात तो सामने ये आती है कि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के एक बड़े हिस्से को ओला की ग्रोथ स्टोरी पर ज्यादा भरोसा नहीं है, सिर्फ मोतीलाल ओसवाल को ही है. क्योंकि और कोई बड़ा फंड इसमें शामिल नहीं है. दूसरी बात ये कि देखने में एक्सपोजर भले ही बहुत कम है, लेकिन NAV पर इसका असर होगा, NAV कम होगी.
इसको जरा एक उदाहरण से समझते हैं -
Fund: Motilal Oswal Special Opportunities
AUM: ₹68.50 करोड़
NAV: ₹10.35
Ola Exposure: 2.98% of AUM
अब चूंकि ओला का शेयर अपने पीक से 80% टूट चुका है.
- ओला में कितना पैसा लगा था: AUM (असेड अंडर मैनेजमेंट) का 2.98% यानी करीब 2.04 करोड़ रुपये
- 80% गिरावट का मतलब: 2.04 करोड़ रुपये से 1.63 करोड़ रुपये साफ हो गए, बचे सिर्फ 0.41 करोड़ रुपये
- कुल यूनिट्स कितनी हैं: AUM/NAV = 68.50/10.35 = करीब 6.62 करोड़
- NAV पर असर कैसे पड़ेगा: कुल नुकसान/कुल यूनिट्स = 1.63 करोड़ रुपये/6.62 करोड़ = करीब 0.25 रुपये प्रति यूनिट
- नई NAV कितनी हो जाएगी: 10.35-0.25 = 10.10 रुपये
% में NAV का नुकसान हुआ 2.4%
नतीजा: अगर एक्सपोजर 2.98% है तो NAV का नुकसान 2.4% है. जो कि छोटा नुकसान तो नहीं कहा जा सकता है. मतलब ये है कि हाई रिस्क स्टॉक में छोटा एक्सपोजर भी NAV को ठीक-ठाक नुकसान पहुंचा सकता है. इसको ऐसे समझ लीजिए कि अगर आपके पास 10,000 यूनिट्स थीं, तो ओला में आई गिरावट की वजह से आपके पोर्टफोलियो की वैल्यू 2,500 रुपये कम हो गई.
ये मैंने आपको समझाने के लिए सिर्फ एक फंड का उदाहरण लिया है. ऐसे ही आप बाकियों का भी खुद अंदाजा लगा सकते हैं. ये आर्टिकल ओला के लिए किसी तरह के निगेटिव या पॉजिटिव परसेप्शन बनाने के लिए नहीं लिखा गया है, बल्कि ये बताने की कोशिश की है कि किसी भी हाईप के पीछे पागलों की तरह भागने का क्या नतीजा हो सकता है.
ओला इकलौती कंपनी नहीं है, जिसने हाईप पैदा किया और परफॉर्म नहीं कर पा रही है, हो सकता है आगे कर भी जाए. ओला से पहले भी कई कंपनियां ऐसी रही हैं, जिन्होंने निवेशकों के सेंटीमेंट्स का जबरदस्त फायदा उठाया, लेकिन अंत में फंसता रिटेलर ही है.
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