पुतिन और निफ्टी में 36 का आंकड़ा! हर भारत के दौरे पर बाजार टूटा! आखिर क्यों?

पुतिन और निफ्टी में 36 का आंकड़ा! हर भारत के दौरे पर बाजार टूटा! आखिर क्यों? 

क्या रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और निफ्टी के बीच में कोई छत्तीस का आंकड़ा है, क्योंकि अक्सर देखा गया है कि जब-जब पुतिन भारत के दौरे पर आए हैं, निफ्टी लाल-लाल हुआ है. तो हमने सोचा कि क्यों न पीछे जाकर इतिहास के पन्नों को खंगाला जाए और देखा जाए कि ऐसा क्यों हुआ, इसकी वजह पुतिन थे या कुछ और? कहीं ऐसा तो नहीं कि नशा शराब का था और इल्जाम बोतल पर लगा दिया गया. वैसे तो पुतिन कई बार भारत दौरे पर आए हैं, क्योंकि भारत और रूस के रिश्ते हमेशा से ही काफी दोस्ताना रहे है, चाहे अमेरिका ने कितना ही मुंह फुलाया हो. 

Why Nifty Crashes During Putin’s India Visits, A 20-Year Pattern Explained

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दो दिवसीय दौरे का आज दूसरा दिन है. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बेहद अहम बैठक होनी है. इसके बाद पुतिन रूस के लिए रवाना हो जाएंगे. पुतिन का यह दौरा कई मायनों में खास है, कई ट्रेड डील्स होने की संभावनाएं हैं. ये इसलिए भी खास है क्योंकि ऐसे समय जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप लगातार भारत की रूस के साथ रिश्तों को लेकर धमकियां दे रहे हैं. 

हमने जब 20 साल पीछे जाकर देखने की कोशिश की तो हमें कुछ पैटर्न मिला, हमने पुतिन के भारत दौरे, उस दौरान निफ्टी के बर्ताव और उस वक्त के वैश्विक और घरेलू हालातों को एक कड़ी में पिरोकर एक साफ तस्वीर बनाने की कोशिश की है. साल 2000 से अब तक के डेटा को देखने पर पता चलता है कि लगभग हर बार पुतिन के भारत दौरे के समय निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई है. यह गिरावट कभी 3-5% रही है, तो कभी यह 15% तक की भारी गिरावट भी रही है. मगर गिरावट का कारण सीधे रूसी राष्ट्रपति का दौरा ही हो, ये पूरा सच नहीं है, शेयर बाजार का गिरना कई जटिल वैश्विक और घरेलू कारकों पर निर्भर करता है.  

पुतिन का भारत दौरा

2–5 अक्टूबर, 2000

निफ्टी50: 12-15% तक टूटा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन साल 2000 में 2-5 अक्टूबर के बीच भारत दौरे पर आए थे, उस वक्त प्रधानमंत्री थे स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी. 2-5 अक्टूबर के दौरान हालांकि निफ्टी50 में कोई बहुत ज्यादा हलचल तो नहीं दिखी, वो स्टेबल और एक रेंज में ही रहा जो कि 1,280 के आस-पास ही था, लेकिन पुतिन के जाने के 2 हफ्ते बाद निफ्टी 12-14% तक फिसल गया. 

कारण

ये गिरावट पुतिन के दौरे के कारण नहीं थी. दरअसल, यह वो समय था जब वैश्विक स्तर पर इंटरनेट और तकनीक कंपनियों का बुलबुला यानी डॉट.कॉम बबल फूट रहा था और पूरी दुनिया में टेक कंपनियों की बैंड बजी हुई थी. भारत उस वक्त भी पूरी दुनिया में IT एक्सपोर्ट का बड़ा खिलाड़ी था, तो जाहिर इसका असर भारत के बाजारों पर भी पड़ना तय था.निवेशकों ने टेक और IT शेयरों में भारी बिकवाली की, जिसकी वजह से निफ्टी टूट गया. यानी टाइमिंग भले ही पुतिन के दौरे से मेल खाती है, लेकिन वजह पुतिन नहीं थे. 

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पुतिन का भारत दौरा

3–5 दिसंबर, 2002

निफ्टी50: 3-4% तक टूटा

दो साल के बाद राष्ट्रपति पुतिन एक बार फिर साल 2002 में भारत दौरे पर आते हैं. 3-5 दिसंबर के बीच ये दौरा काफी महत्वपूर्ण था. हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी पुतिन की इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें थीं. रक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों ने एक दूसरे के साथ सहयोग को बढ़ाने के लिए हाथ मिलाया था. मजे की बात ये है कि साल 2000 में जब पुतिन भारत दौरे पर आए थे, तब से लेकर निफ्टी साल 2002 के दौरे तक 17% से ज्यादा टूट चुका था. 3-5 दिसंबर, 2002 की विजिट के दौरान निफ्टी ने 3-4% का करेक्शन देखा

कारण

लेकिन क्या निफ्टी में गिरावट पुतिन के दौरे की वजह से थी, इसका जवाब है नहीं. ये वो समय था जब पूरी दुनिया में इराक में अमेरिकी सैनिक दखल का खतरा मंडरा रहा था, 11 सितंबर 2001 यानी 9/11 के आतंकवादी हमलों के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन पर बड़े पैमाने पर विनाशकारी हथियार रखने का आरोप लगाया. 2002 के अंत तक, अमेरिका और उसके सहयोगी इराक पर हमला करने के लिए संयुक्त राष्ट्र से अनुमति लेने या फिर भी एकतरफा कार्रवाई करने के लिए तेज़ी से तैयारी कर रहे थे. यानी जियो-पॉलिटिकल हालात बिगड़ रहे थे, तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा मंडरा रहा था, जिसने दुनिया भर के बाजारों को अस्थिर कर दिया था. ऐसे अनिश्चितता के माहौल में FIIs ने भारत से अपना पैसा निकालना तेज कर दिया था.

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पुतिन का भारत दौरा

24 दिसंबर 2012 

निफ्टी50: करीब 1.5% टूटा

पुतिन साल 2012 में भारत दौरे पर आए. 24 दिसंबर, 2012 को दोनों देशों के बीच एक बड़ी डिफेंस डील होती है. भारत और रूस 42 नए सुखोई SU-30MKI लड़ाकू विमान और 71 Mi-17V5 मध्यम-लिफ्ट हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए 3 बिलियन डॉलर के रक्षा सौदे पर हस्ताक्षर करते हैं. उस वक्त प्रधानमंत्री स्वर्गीय मनमोहन सिंह थे. पुतिन की इस यात्रा के दौरान भारतीय बाजार स्थिर थे, लेकिन निफ्टी में 1-1.5% के करीब हल्का फुल्का करेक्शन देखने को मिला था.

कारण

इस दौरान भारतीय बाजारों पर कई घरेलू खबरों का असर था. कुछ बैंकों में प्रॉफिट बुकिंग चल रही थी, कुछ कॉरपोरेट खबरें भी थीं, साथ ही साल का आखिरी ट्रेडिंग हफ्ता था इसलिए वॉल्यूम भी काफी कम था, मार्केट छुट्टी के मोड में था, लोगों ने थोड़ी मुसाफावसूली भी शुरू कर दी थी. इसलिए सीधे तौर पर इसे पुतिन के दौरे से जोड़ना ठीक नहीं है. 

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पुतिन का भारत दौरा

10–11 दिसंबर 2014

निफ्टी50: करीब 5% तक टूटा

साल 2014 में भी राष्ट्रपति पुतिन 15वें सालाना इंडिया-रूस समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आए थे. तब कांग्रेस की सरकार जा चुकी थी और देश को नरेंद्र मोदी के रूप में नया प्रधानमंत्री मिला था. 

दोनों देशों के बीच कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की यूनिट 3 और 4 के निर्माण के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए गए. रूस की सरकारी परमाणु कंपनी रोसाटॉम ने भारत में 12 रिएक्टर बनाने पर सहमति जताई. ये डील भारत के लिए काफी मायने रखती थी. पुतिन की इस विजिट के दौरान निफ्टी में काफी करेक्शन देखने को मिला था.  

कारण

दिसंबर 2014 में निफ्टी में शुरू से ही करेक्शन हो रहा था. दिसंबर की शुरुआत से लेकर पुतिन के आने की तारीख तक निफ्टी 3.5% तक पहले ही टूट चुका था. पुतिन की विजिट के दौरान यानी 10-11 दिसंबर के दौरान निफ्टी में 100 अंकों का करेक्शन दिखा था, लेकिन उनके जाने के बाद ये 4% टूटा. लेकिन इस गिरावट की ज्यादा बड़ी वजह थी घरेलू कंपनियों के खराब नतीजे, इंडस्ट्री सेंटीमेंट्स. इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में 60% से ज्यादा की गिरावट आई, हालांकि यह भारत के लिए इंपोर्ट बिल कम करने के लिहाज से अच्छा था, इसने वैश्विक मंदी की आशंकाओं को जन्म दिया, जिससे निवेशकों में घबराहट फैली. 

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पुतिन का भारत दौरा

4–5 अक्टूबर 2018 

निफ्टी50: करीब 5% की करेक्शन

पुतिन का ये दौरा काफी महत्वपूर्ण था. 19वें  सालाना इंडिया-रूस समिट में दोनों देशों के बीच कई समझौते हुए. S-400 मिसाइल सौदा उसी समय हुआ. अमेरिकी प्रतिबंधों के खतरे के बावजूद, भारत और रूस ने 5 बिलियन डॉलर के S-400 वायु रक्षा प्रणाली सौदे पर मुहर लगाई थी. मगर निफ्टी 50 में 5% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली थी. 

कारण

इतनी बड़ी डील होने के बावजूद भारतीय बाजारों में संदेश अच्छा क्यों नहीं गया. दरअसल, वो समय पूरी दुनिया के बाजारों में हलचल का दौर था. अक्टूबर 2018 दुनिया भर के शेयर बाज़ारों के लिए बेहद खराब महीना साबित हुआ. 10–11 अक्टूबर 2018 को अमेरिकी शेयर बाज़ार में भारी गिरावट आई. अमेरिकी फेड की लगातार ब्याज दरें बढ़ाने की नीति से निवेशकों को डर था कि महंगा पैसा कंपनियों की कमाई को नुकसान पहुंचाएगा. दूसरी वजह अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर की वजह से पैदा हुआ तनाव था. ट्रेड वॉर के कारण निवेशक अब रिस्क लेने के मोड में नहीं थे. 

निवेशकों ने पैसा निकालना शुरू कर दिया था. अमेरिका ने जब छींका तो एशिया के बाजार को बुखार चढ़ गया, भारत भी इससे अछूता नहीं था. इसलिए सीधे तौर पर बाजार की गिरावट को पुतिन के दौरे से जोड़ा ठीक नहीं है. 

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पुतिन का दौरा 

6 दिसंबर, 2021 

निफ्टी50: करीब 3.5% टूटा

21वें सालाना इंडिया-रूस समिट में कई रक्षा सहयोग के समझौतों पर हस्ताक्षर हुए. व्यापार, ऊर्जा, साइंस एंड टेक्नोलॉजी, शिक्षा और संस्कृति सहित कई क्षेत्रों में कुल 28 समझौतों पर दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए. ये दौरा भी काफी सफल रहा था, लेकिन निफ्टी नाराज ही दिखा. 

कारण

6 दिसंबर 2021 को बाजार बुरी तरह टूट गए थे. निफ्टी 17,000 के नीचे फिसल गया था, सेंसेक्स 900 अंकों से ज्यादा गिर गया था. इसकी वजह थी बाजारों पर ओमिक्रॉन का डर. कुछ घरेलू सेक्टोरल फैक्टर्स भी थे, सबसे ज्यादा पिटाई आईटी शेयरों की हुई. सभी सेक्टोर इंडेक्स लाल निशान में ही बंद हुए थे.  FII की बिकवाली ने भी जोर पकड़ लिया था. उस समय पुतिन का दौरा हुआ, वजह पुतिन नहीं बल्कि उस वक्त की परिस्थितियां ही थीं.

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