बड़ी कमजोरी की चपेट में Nifty500! हर 4 में से 1 शेयर 30% से ज्यादा टूटा
क्या शेयर बाजार में सबकुछ ठीक चल रहा है? Nifty 500 इंडेक्स का बीते एक साल में रिटर्न देखें तो ये महज 1% ही है. ताजा डेटा बताता है कि Nifty 500 में शामिल शेयर अपने 52-वीक हाई से औसतन करीब 20% नीचे हैं. अगर मीडियन की बात करें, तो गिरावट करीब 19% है. मीडियन गिरावट का मतलब ये हुआ कि Nifty 500 के 500 शेयरों में से 250 शेयर ऐसे हैं जो 19% या उससे कम गिरे हैं, जबकि बाकी 250 शेयरों की गिरावट 19% से ज्यादा है.
इसका साफ मतलब है कि गिरावट कुछ गिने-चुने शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि बाजार के बड़े हिस्से में फैल चुकी है. इतना ही नहीं, चौंकाने वाली बात यह है कि हर 4 में से करीब 1 शेयर 30% से ज्यादा टूटा है, जो कि एक गंभीर गिरावट के दायरे में है. जबकि पिछले साल यानी 2024 में इसी समय Nifty 500 के हर 6 शेयर में से एक शेयर 20% तक टूटा था.यानी स्थिति पिछले साल के मुकाबले इस साल ज्यादा खराब है.
बाहर से सब चंगा, लेकिन अंदर से गड़बड़
Nifty500 NSE पर लिस्टेड कंपनियों के करीब 92–93% फ्री फ्लोट मार्केट कैप को कवर करता है. यह करीब 70–72 सेक्टर्स में फैला हुआ है. इसका मतलब है कि इस इंडेक्स में सिर्फ बड़े नाम ही शामिल नहीं है, बल्कि लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप तीनों शामिल हैं. हम इस लिस्ट के बारे में चर्चा करेंगे, लेकिन उससे पहले ये समझना जरूरी है कि इस लिस्ट पर चर्चा करना जरूरी क्यों है, तो देखिए - बात ऐसी है कि निफ्टी500 में कुछ हैवीवेट स्टॉक्स इंडेक्स को संभाल लेते हैं, बाहर से सबकुछ संभला हुआ दिखता है, लेकिन इंडेक्स के अंदर कई स्टॉक्स गहरी गिरावट में होते हैं, जो कि बाहरी तौर पर नहीं दिखते हैं. इसलिए जरूरी है कि इंडेक्स के अंदर गहराई से झांककर देखा जाए, ऐसा करने से हमें जो दिखाई दिया वो कुछ इस तरह से है.
इस लिस्ट में 5 ऐसे शेयर हैं जो 60% से ज्यादा टूटे हैं. जिसमें Tejas Networks, Praj Industries, Ola Electric, Vedant Fashions, Reliance Infrastructure शामिल हैं.
- Tejas Networks - 65%
- Praj Industries - 64%
- Ola Electric - 60%
- Vedant Fashions - 60%
- Reliance Infra - 60%
इस लिस्ट में 6 स्टॉक्स ऐसे हैं जो 52वीक हाई से 50% से ज्यादा टूटे हैं. इसमें Cohance Life, TRIL, Brainbees S olutions (FirstCry), Jindal SAW, Jupiter Wagons, Newgen Software और IGIL जैसे शेयर 50% के आसपास या उससे ज्यादा की गिरावट देख चुके हैं.
- Cohance Life: 59%
- TARIL: 58%
- Brainbees Sol: 55%
- Jindal Saw: 53%
- Jupiter Wagons: 51%
- Newgen Software: 51%
इस लिस्ट में 28 शेयर ऐसे हैं जिनमें 40% या इससे ज्यादा की गिरावट रही. जिसमें IGIL, Sonata Software, HFCL, ITI, KEC International जैसे शेयर शामिल हैं.
- IGIL: 49%
- Sonata Software: 48%
- HFCL: 48%
- ITI: 48%
- KEC International: 48%
- Reliance Power: 48%
- NCC: 48%
- Cyient: 47%
- Zen Technologies: 46%
- Ramkrishna Forg: 46%
- Whirlpool India: 46%
- Swan Corp: 45%
- Finolex Cables: 44%
- PG Electroplast: 44%
- Deepak Nitrite: 44%
- Blue Jet Health: 44%
- Trent: 43%
- Clean Science: 43%
- Concord Biotech: 42%
- Natco Pharma: 42%
- Tata Tele Mah: 42%
- Carborundum Uni: 42%
- Thermax: 42%
- UCO Bank: 41%
- Chambal Fert: 41%
- A B Real Estate: 40%
- Valor Estate: 40%
- Titagarh Rail: 40%
गिरावट चौतरफा है
30% से ज़्यादा की गिरावट को किसी शेयर के लिए एक शार्प करेक्शन या यहां तक कि बेयर मार्केट टेरिटरी माना जाता है. Nifty 500 में लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर हैं. इस लिस्ट से साफ दिखता है कि गिरावट सिर्फ मिडकैप या स्मॉलकैप तक सीमित नहीं है. कई लार्जकैप शेयर भी 15–25% तक टूट चुके हैं. बहुत कम लार्जकैप शेयर हैं जो 30% से ज़्यादा नीचे हैं. मिडकैप शेयरों की गिरावट 25% से 40% तक हैं, स्मॉलकैप शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट 50% से 65% तक हैं. इस लिस्ट में हर चौथा शेयर 30% से ज्यादा टूटा है, ये स्मॉलकैप शेयर ही है. यानी सबसे ज्यादा ड्रामा आपको स्मॉलकैप शेयरों में दिखा है. इससे यह साबित होता है कि बाजार की कमजोरी ब्रॉड बेस्ड है, न कि चुनिंदा शेयरों तक सीमित है.
बाजार में गिरावट क्यों है?
अब सवाल ये है कि आखिर बाजार में ये गिरावट आ क्यों रही है, तो इसका कोई एक कारण नहीं है, कई कारण है. चलिए जरा इसको समझते हैं.
पैसा निकाल रहे विदेशी निवेशक
भारतीय शेयर बाजार पर दबाव इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लगातार बिकवाली कर रहे हैं. 5 दिसंबर को FIIs ने 439 करोड़ के शेयर बेचे थे. दिसंबर में अब तक करीब 6,584 करोड़ की बिकवाली कर चुके हैं. नवंबर में तो यह आंकड़ा और भी बड़ा था, तब 11,592 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे. इसके उलट, अक्टूबर में FIIs ने मामूली 918 करोड़ की खरीद की थी. FIIs की लगातार बिकवाली का असर बाजार पर पड़ता है. इससे बाजार में लिक्विडिटी कम होती है, सेंटीमेंट बिगड़ता है खासकर मिड और स्मॉलकैप शेयरों पर ज़्यादा दबाव आता है.
कमजोर रुपये का असर
डॉलर के मुकाबले रुपये में रिकॉर्ड कमजोरी भी शेयर बाजार पर दबाव डाल रही है. 4 दिसंबर को तो रुपये ने 90.46 का नया निचला स्तर भी छुआ था. हैरानी की बात ये है कि भारत की GDP ग्रोथ मजबूत है, जो कि सितंबर तिमाही में 8.2% रही है, साथ ही रिटेल महंगाई भी अक्टूबर में 0.25% पर आ गई है, बावजूद इसके रुपया कमजोर है. कमजोर रुपये की वजह से इंपोर्ट महंगा होता है. कंपनियों की लागत बढ़ती है. इन सबका असर सीधे कॉरपोरेट मुनाफे और बाजार सेंटीमेंट पर पड़ता है.
इसका मतलब यह है कि सिर्फ इंडेक्स देखकर बाजार की सेहत का अंदाजा लगाना खतरनाक हो सकता है. निवेशकों को शेयर चुनते वक्त सेक्टर, वैल्युएशन और बिज़नेस क्वालिटी पर ज़्यादा ध्यान देना होगा, क्योंकि ब्रॉड-बेस्ड करेक्शन में कमजोर शेयर सबसे ज्यादा पिटते हैं.
Insta - Mehrotra Sumit (@sumitresearch)

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