साल 2025 में विदेशी निवेशकों के बीच झोला उठाकर भागने की जैसे होड़ लगी रही. ताजा डेटा बताते हैं कि इस साल विदेशी निवेशक (FIIs) भारतीय शेयर बाजार से 2.91 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं, जबकि साल 2024 में FIIs ने 3.02 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की थी. अभी दिसंबर का महीना खत्म नहीं हुआ है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि साल 2025 विदेशी निवेश के मामले में सबसे बुरा साल रहने वाला है.
एक साल में 365 दिन होते हैं, इसमें 88 वीकेंड्स और 14 छुट्टियों को निकाल दें तो 12 दिसंबर तक कुल 234 ट्रेडिंग दिन होते हैं. अब 2.91 लाख करोड़ रुपये को इस पूरे साल में फैला दिया जाए तो एक दिन में FIIs की ओर से 1,243 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई. दिन में 6 घंटे का ट्रेडिंग सेशन होता है, यानी 207 करोड़ रुपये हर घंटे बिकवाली हुई.
2025 में सबसे बड़ी बिकवाली का रिकॉर्ड
इस साल इन 234 ट्रेडिंग दिनों में 141 दिन नेट सेलर ही रहे, यानी उन्होंने ज्यादातर वक्त बिकवाली ही की. अगर ये बिकवाली ऐसी चलती रही तो साल 2022 का 146 दिनों की बिकवाली का रिकॉर्ड टूटने में देर नहीं लगेगी. अगर ऐसा हुआ तो ये साल 2008 के बाद सबसे ज्यादा दिनों की बिकवाली होगी. साल 2008 में ग्लोबल मंदी की वजह से बिकवाली के दिन 154 थे.
अब देखने वाली बात ये है कि FIIs की लगातार बिकवाली के बावजूद बाजार को उतने बड़े झटके नहीं लगे. वजह- घरेलू जाबाज़ों ने मोर्चा संभाल रखा था. इस साल दिसंबर के महीने में विदेशी निवेशक अबतक सभी दिन नेट सेलर्स बने रहे और एक्सचेंजेस के जरिए करीब 15,959 करोड़ रुपये की बिकवाली की है. जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब 39,965 करोड़ रुपये के शेयरों की खरीद करके हिसाब बराबर कर लिया. FIIs की बिकवाली से जो झटका लगना चाहिए था, वो DIIs ने के शॉक एब्जॉर्वर ने लगने नहीं दिया.
FIIs ने अक्टूबर 2024 से भारतीय शेयरों की बिकवाली शुरू की थी, वक्त के साथ ये ट्रेंड जोर पकड़ता रहा. हालांकि बीच बीच में हल्के फुल्के खरीदारी के मौके भी आए, लेकिन आखिर में 2025 विदेशी निवेशकों की बिकवाली के मामले में सबसे खराब साल बन गया. FIIs का रुझान सेकेंडरी मार्केट पर भले ही नहीं रहा हो, लेकिन प्राइमरी मार्केट में इन्होंने अच्छा पैसा झोंका है. 2025 में अब तक FIIs ने प्राइमरी मार्केट में करीब 67,000 करोड़ का निवेश किया है.
FIIs की हिस्सेदारी घटी
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि FIIs की लगातार बिकवाली के चलते भारतीय शेयर बाजार में उनकी हिस्सेदारी 15 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है.
ताज़ा मार्केट ओनरशिप डेटा के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में NSE में लिस्टेड कंपनियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की हिस्सेदारी घटकर 16.9% रह गई, जो कि 15 साल से ज्यादा का सबसे निचला स्तर है. यह बिकवाली व्यापक स्तर पर देखने को मिली, क्योंकि NIFTY50 और NIFTY500 में भी विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी घटकर क्रमशः 24.1% और 18% रह गई, जो 13 साल से ज्यादा का निचला स्तर है.
जबकि दूसरी तरफ घरेलू म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 10.9% पर पहुंच गई, जिसे SIP के लगातार इनफ्लो और इक्विटी में स्थिर खरीद का सहारा मिला. सितंबर तिमाही में भारत की कॉरपोरेट कंपनियों में म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी लगातार नौवीं तिमाही रिकॉर्ड स्तर पर रही. कुल मिलाकर, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार चौथी तिमाही में FPIs से बेहतर प्रदर्शन किया, जो इससे पहले आखिरी बार 2003 में देखने को मिला था.
डायरेक्ट रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी लगभग स्थिर रहते हुए 9.6% पर बनी रही, लेकिन जब इसे म्यूचुअल फंड होल्डिंग्स के साथ जोड़ा जाए, तो अब व्यक्तिगत निवेशकों के पास कुल बाजार का 18.75% हिस्सा है, जो कि पिछले 22 साल का सबसे ऊंचा स्तर है.
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